Application of C++ in Hindi, C++ के उपयोग हिंदी में

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c ++ (सी प्लस प्लस) सबसे लोकप्रिय प्रोग्रामिंग भाषाओं ( Programming Language ) में से एक है । जिसका उपयोग सिस्टम ( System ) या एप्लीकेशन ( Application ) सॉफ्टवेर ( Software ), ड्राइवर ( Driver) , क्लाइंट-सर्वर एप्लीकेशन (Client Server Application ) बनाने में होता है ।

c ++ एक ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है जिसे Bjarne Stroustrup (स्ट्रॅसतरप ) द्बारा 1979 से 1983 के बीच बनाया गया था । आमतौर पर c ++ प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को मिडिल लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज माना जाता है क्योंकि इसमें High level Programming Language (हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज ) और Low Level Programming Language (लो लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज ) दोनों के गुण मौजूद है|

c ++ Programming Language को c programming language से बिकसित किया गया है और हम जो कुछ भी c से कर सकते है वो c ++ से भी कर सकते है । c और c ++ का मुख्य अंतर Object Oriented Programming (ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग) का है । c ++ में हम क्लास(class) बना सकते है ऑब्जेक्ट(object ) बना सकते है जो की C Programming Language में मुमकिन नहीं है ।

Why Should You Learn C++? (आपको C++ क्यों सीखना चाहिए?) :-

आप कई अन्य प्रोग्रामिंग भाषाओं (Programming languages) को सीख सकते हैं, लेकिन सी ++ सीखने का का मुख्य कारण यह है की C ++ उन प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में से एक है जो काफी पुराना होने के बाद भी आज तक लोकप्रिय है | 1979 में जब पहली बार C ++ प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को बनाया गया था उसके बाद बहुत सारे नए प्रोग्रामिंग लैंग्वेज बाजार में आए और चले भी गए लेकिन C ++ प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का उपयोग आजतक हजारों सॉफ्टवेयर बनाने के लिए किया जाता है | 2017 के आंकड़ों के अनुसार आज भी C ++ प्रोग्रामिंग लैंग्वेज तीसरी सबसे लोकप्रिय प्रोग्रामिंग भाषा है |

Features Of C++ Programming Language (सी ++ प्रोग्रामिंग भाषा की विशेषताएं):-

  1. C++ Program को साधारण अंग्रेजी भाषा में लिखा जा सकता है ताकि Programmer द्वारा इसे सीखना , समझना और विकसित करना बहुत आसान हो।
  • C Plus Plus प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का उपयोग हर प्रकार के software (सॉफ्टवेयर) और applicationबनाने के लिए किया जाता है| C++ प्रोग्रामिंग लैंग्वेज से हम ऑपरेटिंग सिस्टम भी बना सकते हैं और कोई साधारण सा सॉफ्टवेयर भी बना सकते हैं |
  1. C++ एक बहुत ही fast प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है इसमे Source Code के Execute होने और Output मिलने का समय काफी कम है इसी कारण बड़े-बड़े जटिल Software बनाने के लिए भी C++ प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का उपयोग किया जाता है |
  2. C++ एक platform (प्लेटफॉर्म) dependent(आश्रित) language(भाषा) है| इसका मतलब यह है कि अगर C++ को किसी एक ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) पर Execute करवाया गया है तो इस Executed File को किसी दूसरे ऑपरेटिंग सिस्टम पर नहीं चलाया जा सकता है अर्थात अगर हम Windows पर C++ कोडिंग लिखते हैं और Code को भी Execute करवा देते हैं तो हमें जो Executed File मिलेगा उसे हम दूसरे ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे कि Linux पर नहीं चला सकते हैं |
  • सी ++ एक बहुत शक्तिशाली प्रोग्रामिंग भाषा (powerful programming language) है, इसमें data types, फ़ंक्शन(functions), control statements , decision making statements, आदि की व्यापक उपयोग होता है |
  • C++ का यह मुख्य विशेषता यह है कि C++ एक ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (object oriented programming language) है। C++ object oriented programming के सभी गुण जैसे कि polymorphism, inheritance, encapsulation, abstraction का पालन करता है |
  • C++ एक case sensitive प्रोग्रामिंग भाषा (programming language) हैं | इसका मतलब यह है कि C++ में capital letters A और Small letters a का अलग-अलग मतलब होता है |
  1. Pointer एक Variable (वेरिएबल) होता है जिसके अंदर दूसरे Variable का Address जमा होता है C++ प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में Pointer का बहुत अच्छा उपयोग किया गया है | C++ प्रोग्रामिंग में हमलोग pointer का उपयोग किसी Variable के Address को जमा करने के लिए बड़ी आसानी से कर सकते हैं |
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